बेटी होना इतना भी आसान नही,
कौन अपना और पराया पहचान नही।
गर्भ में आते ही चुनौतियाँ प्रारंभ हो जाती है,
सौभाग्य की बात होती है अगर वो जन्म ले पाती है।
बेटा होने पर जहाँ बड़े बड़े केक काटे जाते है,
बेटी के आने पर लड्डू तक नही बाँटे जाते है।
बेटी को इस बात का भी कोई अफ़सोस नही,
क्योंकि वो जानती है इसमें उसका कोई दोष नही।
मानवता भी देखो अब शर्मशार हो रही है,
मासूम सी बच्ची भी पापियों के हाथो शिकार हो रही है।
ऐसिड अटैक का भी इस समाज में ख़ूब बोलबाला है,
समाज के लिए ये भी धब्बा काला है।
हर क़दम पर जीवन के बेटी छली जाती है
कई बार तो परेशान होकर इस दुनियाँ से चली जाती है।
ना जाने ये कैसी परंपरा चलाई जाती है,
दहेज की आग में भी बेटी ही जलाई जाती है।
सारी कुरीतियाँ तो बेटियों से जुड़ी है,
लेकिन बेटी क्या कभी अपने कर्तव्यों से मुड़ी है।
अब भी समझो बेटी सिर्फ़ कष्ट सहने को मेहमान नही,
इस धरती पर बेटी होना इतना भी आसान नही।

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