यह दो अक्षरों से बना शब्द ' मन ' बड़ा ही चमत्कारी है यह कुछ भी कर सकता है समस्त धर्मो के साथ साथ विज्ञान भी मानता है की मन को साधकर हम दुनिया का कोई भी सुख प्राप्त कर सकते है चाहे वो आर्थिक हो , शारीरिक हो , मानसिक या भौतक |
यह मन की शक्ति ही थी जिसने किसी को देवता , किसी को संत , और किसी को तीर्थकार बना दिया | सारे आविष्कार सारी खोजे इसी मन की शक्ति की देन है | मन की शक्ति से कोई भी साधारण से असाधारण बन सकता है |
महात्मा गाँधी एक साधारण व्यक्ति थे , मगर अपने मन को साध कर वे विश्व के महान तम व्यक्तित्व हो गये , उनके पास कौनसा धन था ? सिपाही या अलादिन का चिराग था , कुछ भी न होने के बावजूद इन्होने आजादी के जंग में महान काम करके दिखाया , इसी मन की शक्ति की बदौलत |
महाभारत के संजय के पास कौनसा यन्त्र था जो वो युद्ध का आँखों देखा हाल ध्र्तराष्ट और गांधारी को सुना देते थे ,वो मन की शक्ति ही तो थी |
अमिताब बच्चन को कौन नही जानता उन्हें कभी उनकी लम्बी टांगो और खराब आवाज के कारण अयोग्य घोषित कर दिया गया था .वे अपमानित होते थे, लेकिन मन की शक्ति से उन्होंने अपनी विपलता को सफलता में बदल दिया | ऐसे लाखो उदारहण, प्राचीन ग्रंथो में ,अविष्कार की दुनिया में बिजनेस में |
मन की यह शक्ति आप सब के पास है ,समान रूप से है ,आप मन को साथ कर दुनिया बदल सकते है ,अपना मुकधर बदल सकते है | आपका मन बिजली की तरह है जिसका आप उपयोग तो करते है ,देख नही पाते | ठीक वेसे ही मन को नहीं देख पाते |
मन तो कंप्यूटर की तरह है ,कंप्यूटर की क्षमता उसमे मोजुद सॉफ्टवेर से होती है यदि कंप्यूटर में ज्योतिष का सोफ्टवेर है तो कंप्यूटर ज्योतिष कर पायगा यदि एकोन्टिंग सॉफ्टवेर इसमे है तो एकोन्टिंग कर पायगा इसमे जो सोफ्टवेर डाला जायगा यह उसी की गणना करना शुरू करता है | मन भी एक कंप्यूटर की तरह है ,विज्ञान कहता है की आप इस कंप्यूटर में में कभी कोई भी दूसरा सॉफ्टवेर डाल सकते है | खुश रहने का सॉफ्टवेर कामयाब होने का सोफ्टवेर | आप मन के बदोलत दुनिया में राज कर सकते है |
अच्छा आप जानते है हमारे पास दो मन है एक बाहरी ,दूसरा आंतरिक मन, एक चेतन मन ,दूसरा अवेचेतन ,एक जागृत मन ,दूसरा अर्धजागृत मन
यह चेतन और अवचेतन मन हिमशिला की तरह होते है जब हिमशिला पानी में तैरती है तो सिर्फ १० प्रतिशत भाग ही दिखता है ,९० प्रतिशत भाग पानी के अन्दर होता है ठीक वैसे ही हमारा जागृत मन है जिसका १० प्रतिशत हिस्सा हम महसूस करते है और ९० प्रतिशत हिस्सा जो अर्धजागृत मन है उसे हम अनुभव नहीं कर पाते | हमारा जागृत मन जब हम जागते है तभी काम करता है यह तर्क करता है ,डरता है ,सोचता है लेकिन इसकी शक्ति सीमित होती है |लेकिन अर्धजागृत मन २४ घंटे काम करता है तर्क नहीं करता है ,सोचता नहीं है , सृजन करता |जागृत मन सपने देखता है , अर्धजागृत मन उसे पूरा करता है |
यह मन की शक्ति ही थी जिसने किसी को देवता , किसी को संत , और किसी को तीर्थकार बना दिया | सारे आविष्कार सारी खोजे इसी मन की शक्ति की देन है | मन की शक्ति से कोई भी साधारण से असाधारण बन सकता है |
महात्मा गाँधी एक साधारण व्यक्ति थे , मगर अपने मन को साध कर वे विश्व के महान तम व्यक्तित्व हो गये , उनके पास कौनसा धन था ? सिपाही या अलादिन का चिराग था , कुछ भी न होने के बावजूद इन्होने आजादी के जंग में महान काम करके दिखाया , इसी मन की शक्ति की बदौलत |
महाभारत के संजय के पास कौनसा यन्त्र था जो वो युद्ध का आँखों देखा हाल ध्र्तराष्ट और गांधारी को सुना देते थे ,वो मन की शक्ति ही तो थी |
अमिताब बच्चन को कौन नही जानता उन्हें कभी उनकी लम्बी टांगो और खराब आवाज के कारण अयोग्य घोषित कर दिया गया था .वे अपमानित होते थे, लेकिन मन की शक्ति से उन्होंने अपनी विपलता को सफलता में बदल दिया | ऐसे लाखो उदारहण, प्राचीन ग्रंथो में ,अविष्कार की दुनिया में बिजनेस में |
मन की यह शक्ति आप सब के पास है ,समान रूप से है ,आप मन को साथ कर दुनिया बदल सकते है ,अपना मुकधर बदल सकते है | आपका मन बिजली की तरह है जिसका आप उपयोग तो करते है ,देख नही पाते | ठीक वेसे ही मन को नहीं देख पाते |
मन तो कंप्यूटर की तरह है ,कंप्यूटर की क्षमता उसमे मोजुद सॉफ्टवेर से होती है यदि कंप्यूटर में ज्योतिष का सोफ्टवेर है तो कंप्यूटर ज्योतिष कर पायगा यदि एकोन्टिंग सॉफ्टवेर इसमे है तो एकोन्टिंग कर पायगा इसमे जो सोफ्टवेर डाला जायगा यह उसी की गणना करना शुरू करता है | मन भी एक कंप्यूटर की तरह है ,विज्ञान कहता है की आप इस कंप्यूटर में में कभी कोई भी दूसरा सॉफ्टवेर डाल सकते है | खुश रहने का सॉफ्टवेर कामयाब होने का सोफ्टवेर | आप मन के बदोलत दुनिया में राज कर सकते है |
अच्छा आप जानते है हमारे पास दो मन है एक बाहरी ,दूसरा आंतरिक मन, एक चेतन मन ,दूसरा अवेचेतन ,एक जागृत मन ,दूसरा अर्धजागृत मन
यह चेतन और अवचेतन मन हिमशिला की तरह होते है जब हिमशिला पानी में तैरती है तो सिर्फ १० प्रतिशत भाग ही दिखता है ,९० प्रतिशत भाग पानी के अन्दर होता है ठीक वैसे ही हमारा जागृत मन है जिसका १० प्रतिशत हिस्सा हम महसूस करते है और ९० प्रतिशत हिस्सा जो अर्धजागृत मन है उसे हम अनुभव नहीं कर पाते | हमारा जागृत मन जब हम जागते है तभी काम करता है यह तर्क करता है ,डरता है ,सोचता है लेकिन इसकी शक्ति सीमित होती है |लेकिन अर्धजागृत मन २४ घंटे काम करता है तर्क नहीं करता है ,सोचता नहीं है , सृजन करता |जागृत मन सपने देखता है , अर्धजागृत मन उसे पूरा करता है |
You have shared great article , i like
ReplyDeletethank you
ReplyDelete[…] शिष्यों को आश्चर्य हुआ | बुध्द उनके मन का भाव समझ गये और बोले – “ हाँ , वह अस्पृश्य है […]
ReplyDelete[…] ये भी पढ़े – अवचेतन मन की शक्ति जो सोचोगे वही मिलेग… […]
ReplyDelete[…] है। उसे कौशल/शिल्प का रूप दे सकती है। मन का प्रभाव व्यापक होता है। उसको किसी […]
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