लम्हा लम्हा वक़्त गुज़रता नही,
तेरे वियोग जैसा कष्ट दूसरा नही।
क्या हुआ तेरा वादा कुछ पल में लौट आने का
तेरी तरह ऐसे कोई मुकरता नही।
इंतज़ार की घड़ियाँ पुरानी हो चली,
मिलने की घटनाएँ कहानी हो चली।
कटता नही वक़्त एक तेरे बिना,
आँखें भी अब पानी हो चली।
लगता है सदियाँ बीत चुकी हो,
रो रो अखियाँ रीत चुकी हो।
सावन भी पतझड़ लगता है,
जैसे डूब प्रीत चुकी हो।
सारी दुनियाँ सूनी सूनी, एक तेरे चुप हो जाने से,
सारे मंगल हुए अमंगल एक तेरे ना आने से।
जीवन सारा ख़त्म हो चुका इंतज़ार में तेरे,
ये पागल है नही समझता कितना भी समझाने से।


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