जीवन- दर्शन की अभिव्यक्ति
उन्मुक्त होकर गगन को छू लूँ
पल भर में पावन धरती को नमन कर लूँ ,
कुछ इन्द्रधनुष के रंगों को चुनकर
आसमाँ को छायांकित कर दूँ
मन की अभिव्यक्ति को अपनी दिल से लिख दूँ
किरणों की अभिदिशा से जीवन दर्पण में नयी कविता लिख दूँ
चाँद सा मुखड़ा, बादलो में जान भर दूँ
गगन से बारिश के बूंदों से
पावन धरती को सींच दूँ
स्नेह, प्रेम की भाव मुग्धता, जिज्ञासा को हर इंसान में भर दूँ ,
जीवन- दीप प्रकाश को इस संसार में प्रज्वलित कर दूँ
उन्मुक्त होकर गगन को छू लूँ,
जीवन आनंद को अपने आप से सींच लू
सागर की लहरों जैसी, जीवन संघर्ष को,
सूरज की रौशनी सा सुखमय कर दूँ,
जीवन पथ की कठिनता को,
इंसानियत की परिभाषा देकर,
संसार में खुशियों की दीप जला दूँ
जीवन दर्शन की रूपरेखा को,
इन्द्रधनुष के रंगो में रंग दूँ
अपनी अंतरात्मा की आवाज़ को दुनिया में भर दूँ,
उन्मुक्तता की अभिलाषा को हर कण -कण में सींच दूँ
उन्मुक्त होकर गगन को छू लूँ,
पल भर में पावन धरती को नमन कर लूँ
-------------- ----- अखिलेश कुमार भारती ------------------------------

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