जीवन- दर्शन की अभिलाषा Jivan Darshan Ki Abhilasha





जीवन- दर्शन की अभिलाषा 

अँधियारी जाने को है,
नया सवेरा आने को है
जीवन के कठिन मोड़ पे,
नए चेतना उन्मुक्त होने को है |
जीवन को उत्कृष्ट करें,
तन-मन को निर्मल करें
ह्रदय को पवित्र करें
नया वातावरण बनने को है |
अपनी कुशल क्षमताएँ पहचानें,
सारी सुख-सुविधाएँ आने को है |
को कविता आप आने को है,
चेहरे पर मुस्कान लेकर
जीवन के कठिन मोड़ पे,
नए मुकाम हासिल होने को है |
सागर की लहरो जैसा,
जीवन में आनंद आने को है
सूरज की रौशनी सा,
दुनिया में नया सवेरा होने को है
नए मुकाम हासिल होने को है |   

-------AKHILESH KUMAR BHARTI (Akhilesh.bharti59@gmail.com)---------------------

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