लोग डरते हैं समाज से
डर जो उनके अंदर फैला है
इस तरह कि उनके अपने विचारों पर
हावी होता है समाज
वो छुपाते हैं उसे
जो अप्रिय लगे सबको
जिससे उनके अस्तित्व पर कुठाराघात हो
चोट एक निजी अहसास है
उन्हें समाज में जीना है
वो समाज जो हर किसी को तोलता है
स्वयं को छोड़कर
वो चाशनी में डुबोकर
झूठ को सच बना देता है
और इस तरह वो साबित होता है
एक बेहतरीन पत्रकार
चाशनी हानिकारक होती है
सभ्य समाज के लिए भी
लेकिन वो लगातार खाता है
क्योंकि यहीं तो सभ्यता की निशानी है
उस समाज की जो खड़ा है
झूठ, कुंठा और फ़रेब के मैदानों में
उसे पोषण मिलता है उसके इस प्रकार
अंतहीन विस्तार से
वो जन्मता है
निरंतर नए घावों को
जो पहले से भी बड़े होते हैं
और उनमें तैर कर कुछ लोग
धन और ऐश्वर्य अर्जित करते हैं ।
इतना आसान नहीं है यहाँ जीना
आपको वो सब करना पड़ता है
जो आपसे पहले के लोग करते थे
शोषण उस सभ्य समाज का
जिसे अपनी सभ्यता पर गर्व है
किसी का हक आप मारिये
और वो खुशी- खुशी
बन जाता है आपका गुलाम
जैसे उसे यहीं तो सिखाया गया है सदियों से
उसके हक को छिनकर
कुछ लोग सत्ता के शिखर पर बैठते हैं
और वो कहता है हम कर भी क्या सकते हैं
शोषण के लिए जिसका जन्म हुए
उसे पोषण मिलना भी नहीं चाहिए
क्योंकि उसके बलवान होने न होने से
कोई परिवर्तन नहीं आएगा ।
डर जो उनके अंदर फैला है
इस तरह कि उनके अपने विचारों पर
हावी होता है समाज
वो छुपाते हैं उसे
जो अप्रिय लगे सबको
जिससे उनके अस्तित्व पर कुठाराघात हो
चोट एक निजी अहसास है
उन्हें समाज में जीना है
वो समाज जो हर किसी को तोलता है
स्वयं को छोड़कर
वो चाशनी में डुबोकर
झूठ को सच बना देता है
और इस तरह वो साबित होता है
एक बेहतरीन पत्रकार
चाशनी हानिकारक होती है
सभ्य समाज के लिए भी
लेकिन वो लगातार खाता है
क्योंकि यहीं तो सभ्यता की निशानी है
उस समाज की जो खड़ा है
झूठ, कुंठा और फ़रेब के मैदानों में
उसे पोषण मिलता है उसके इस प्रकार
अंतहीन विस्तार से
वो जन्मता है
निरंतर नए घावों को
जो पहले से भी बड़े होते हैं
और उनमें तैर कर कुछ लोग
धन और ऐश्वर्य अर्जित करते हैं ।
इतना आसान नहीं है यहाँ जीना
आपको वो सब करना पड़ता है
जो आपसे पहले के लोग करते थे
शोषण उस सभ्य समाज का
जिसे अपनी सभ्यता पर गर्व है
किसी का हक आप मारिये
और वो खुशी- खुशी
बन जाता है आपका गुलाम
जैसे उसे यहीं तो सिखाया गया है सदियों से
उसके हक को छिनकर
कुछ लोग सत्ता के शिखर पर बैठते हैं
और वो कहता है हम कर भी क्या सकते हैं
शोषण के लिए जिसका जन्म हुए
उसे पोषण मिलना भी नहीं चाहिए
क्योंकि उसके बलवान होने न होने से
कोई परिवर्तन नहीं आएगा ।
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