खुदा पर कविता - Enjoy Our Famous and Latest Poem on Khuda


खुदा



इस दुनियां में कुछ भी
खुदा से अंजान नहीं है,
उसकी कोई भी फितरत
इस जहान में बेईमान नहीं है,
रहमतों में उसकी वो नूर है
पल में इन्साँ खुशियों के पास
पल में गमों से दूर है,
अंधेरों में खोते जीवन को
खुदा की पहचान नहीं है,
वीरान जिंदगी में खुदा ने
महफिल सजाई है
गम की राहों में खुशियों की
मंजिल बनाई है,
खुदा की इबादत से
कोई इन्साँ परेशान नहीं है ।

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