लिखता हूँ मैं जब भी कुछ!!
वो पल मेरे सबसे ख़ूबसूरत होते है..
जिनमें सिर्फ तुम्हारा ज़िक्र होता है ।
महसूस कर सकता हूँ मैं
तुम्हारी सांसो को
फिर उस वक़्त ...
मुझे बिलकुल भी नहीं लगता
कि तुम मुझसे दूर हो ,
क्योंकि तुम्हारा अक्स
उन शब्दों में मुझे नज़र आता है..
लगता है जैसे
तुम मेरे सामने बैठी हो,
और कागज़ पर मैं
तुम्हें उतार रहा हूँ..
जब तुम अपने लिए
मेरे लफ्ज़ पढ़ते होगे !!
और जो मुस्कराहट आती होगी!!
तुम्हारे चेहरे पर ,,
हाँ वही...
जिस के लिए
मैं कुछ भी कर सकता हूँ,
कुछ भी!!!
तुम बहुत कहते थे न
कि मैं पागल हूँ,
पर मुझे अनजाने में
किसी अपने से भी ज़्यादा
अपनापन मिला था तुम से,,
हाँ इस लिए
मैं थोड़ा सा पागल हुआ था..
तुम मेरी ज़िन्दगी में
वो हिस्सा बन कर आए थे ,
जिसे मैं शायद
ज़िन्दगी भर नहीं भूलना चाहता ..
फिर चाहे राहें
कितनी ही जुदा क्यों न हो हमारी
पर ये इतनी अनजानी सी
दोस्ती हमेशा रहेगी..
एक एहसास चाहता हूँ
के कोई अनजाना सा अपना था
इन अपनो के बीच मेरा ,,,
तुमसे मेरा क्या रिश्ता था
ये मैं कभी नहीं समझ पाऊंगा..
कभी लगता है
एक बेहिसाब दोस्ती थी,,
तो कभी कभी लगता है
तुम मेरी ज़िंदगी थी..
अब एक ख़्वाब हो तुम
जो हर रात को आते हो
और सुबह खो जाते हो ..
तुम सबसे अलग हो,
शायद इसीलिये हर बार
मेरी कोशिश अधूरी रह जाती थी ..
पर अब सोचता हूँ ,
तुम्हें हमेशा अधूरा ही रखूँ.,,
ताकि फिर लिखने की चाह में ,
बस तुम्हें लिखता रहूँ..
और तुम्हें महसूस करता रहूँ...
अधूरी ख़्वाहिशो के साथ...
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