बैंक में फिक्सड डिपाजिट करवाना सबसे फायदेमंद और सुरक्षित माना जाता है | इसमें फिक्स्ड डिपाजिट कराने वाले निवेशको को एक तय किये हुए अंतराल पर निश्चित रिटर्न्स भी मिलते हैं और market के उतार चढाव का इसपर कोई असर भी नहीं पड़ता है | ज्यादातर फाइनेंसियल adviser आपको यही सलाह भी देते हैं की आप अपने जमा पूंजी की राशी बैंक में फिक्स्ड डिपाजिट करवाएं और अच्छे रिटर्न्स भी पाएं, हालाँकि ये सच भी है | परन्तु एक्सपर्ट्स के अनुसार इन सब बातो के बावजूद भी फिक्स्ड डिपाजिट के कुछ नुकसान भी हो सकते हैं |
आज हम आपको अपने इस आर्टिकल में फिक्स्ड डिपाजिट से होने वाले कुछ फायदों और नुकसानों के बारे में बतायेंगे |
किसी भी बैंक में या पोस्ट ऑफिस में फिक्स्ड डिपाजिट करवाने के फायदे ये हैं की ऐसे निवेश पूरी तरह से जोखिमों से परे होते है,मतलब इनमे किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं होता है न ही ये किसी प्रकार के अन्य लिंक से जुड़े होते हैं | फिक्स्ड डिपाजिट करवाते वक़्त तय हुए समय के पुरे होते ही निवेशक यानि फिक्स्ड डिपाजिट करवाने वाले को पूरी राशी ब्याज सहित वापस मिल जाती है | यहाँ हम आपको ये भी बता दें की सीनियर citizens के लिए ब्याज दर थोडा अधिक होता है | बैंक भी समय-समय पर बाजार के उतार-चढ़ाव के अनुसार फिक्स्ड डिपाजिट की दर को तय करते रहते हैं | हर बैंक में दी जाने वाली ब्याज दर में कोई ज्यादा अंतर नहीं होता है | बस थोड़े बहुत का ही फर्क होता है |
ये भी जान लें की कई बैंक निवेशको को आकर्षित करने के लिए उचि-उची ब्याज दर देने का भी ऑफर देते हैं |
बैंक के फिक्स्ड डिपाजिट पर मिलने वाला ब्याज दर हमेशा महंगाई के दर के बराबर ही होता है | कई बार ये ब्याज दर महंगाई दर से कम भी रह जाता जाता है, परन्तु ऐसा काफी कम ही होता है | २०१२-२०१४ के दौरान भारत की महंगाई की दर लगभग 9.76 प्रतिशत थी | एक्सपर्ट इनवेस्टमेंट options पर रिटर्न्स को जोड़ते समय उपभोक्ता महंगाई की औसत दर 8 प्रतिशत के बराबर ही मानते हैं | ऐसे में बैंक FD पर निवेशको को 8 से 8.5 प्रतिशत का ही ब्याज दर मिलता है | ऐसे में निवेशको के लिए महंगाई दर को मात दे पाना बहुत ही मुश्किल काम हो जाता है | इसलिए कभी कभी निवेशको के इनवेस्टमेंट पर मिलने वाले रिटर्न्स दर काफी कम या शुन्य ही हो जाते हैं |
आपके लिए ये जानना भी आवश्यक है की बैंक के फिक्स्ड डिपाजिट पर मिलने वाला रिटर्न्स में भी टैक्स देने की आवश्यकता होती है | परन्तु काफी ज्यादा समय के लिए किये गये फिक्स्ड डिपाजिट टैक्स फ्री भी होते हैं | इसलिए मिलने वाला रिटर्न्स काफी घट भी जाते हैं | इसलिए महंगाई की दर, कम रिटर्न्स का मिलना तथा उसके ऊपर भी टैक्स चुकाने का मसला और इन सब के बाद निवेशको के पास जो आता है वो शुद्ध कमाई तो होती है परन्तु काफी कम होती है और यही क्रिया फिक्स्ड डिपाजिट के निवेश को बेहतर नहीं बनाती है |
आज हम आपको अपने इस आर्टिकल में फिक्स्ड डिपाजिट से होने वाले कुछ फायदों और नुकसानों के बारे में बतायेंगे |
फिक्स्ड डिपाजिट या FD करवाने के फायदे
किसी भी बैंक में या पोस्ट ऑफिस में फिक्स्ड डिपाजिट करवाने के फायदे ये हैं की ऐसे निवेश पूरी तरह से जोखिमों से परे होते है,मतलब इनमे किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं होता है न ही ये किसी प्रकार के अन्य लिंक से जुड़े होते हैं | फिक्स्ड डिपाजिट करवाते वक़्त तय हुए समय के पुरे होते ही निवेशक यानि फिक्स्ड डिपाजिट करवाने वाले को पूरी राशी ब्याज सहित वापस मिल जाती है | यहाँ हम आपको ये भी बता दें की सीनियर citizens के लिए ब्याज दर थोडा अधिक होता है | बैंक भी समय-समय पर बाजार के उतार-चढ़ाव के अनुसार फिक्स्ड डिपाजिट की दर को तय करते रहते हैं | हर बैंक में दी जाने वाली ब्याज दर में कोई ज्यादा अंतर नहीं होता है | बस थोड़े बहुत का ही फर्क होता है |
ये भी जान लें की कई बैंक निवेशको को आकर्षित करने के लिए उचि-उची ब्याज दर देने का भी ऑफर देते हैं |
फिक्स्ड डिपाजिट या FD करवाने के नुकशान
बैंक के फिक्स्ड डिपाजिट पर मिलने वाला ब्याज दर हमेशा महंगाई के दर के बराबर ही होता है | कई बार ये ब्याज दर महंगाई दर से कम भी रह जाता जाता है, परन्तु ऐसा काफी कम ही होता है | २०१२-२०१४ के दौरान भारत की महंगाई की दर लगभग 9.76 प्रतिशत थी | एक्सपर्ट इनवेस्टमेंट options पर रिटर्न्स को जोड़ते समय उपभोक्ता महंगाई की औसत दर 8 प्रतिशत के बराबर ही मानते हैं | ऐसे में बैंक FD पर निवेशको को 8 से 8.5 प्रतिशत का ही ब्याज दर मिलता है | ऐसे में निवेशको के लिए महंगाई दर को मात दे पाना बहुत ही मुश्किल काम हो जाता है | इसलिए कभी कभी निवेशको के इनवेस्टमेंट पर मिलने वाले रिटर्न्स दर काफी कम या शुन्य ही हो जाते हैं |
आपके लिए ये जानना भी आवश्यक है की बैंक के फिक्स्ड डिपाजिट पर मिलने वाला रिटर्न्स में भी टैक्स देने की आवश्यकता होती है | परन्तु काफी ज्यादा समय के लिए किये गये फिक्स्ड डिपाजिट टैक्स फ्री भी होते हैं | इसलिए मिलने वाला रिटर्न्स काफी घट भी जाते हैं | इसलिए महंगाई की दर, कम रिटर्न्स का मिलना तथा उसके ऊपर भी टैक्स चुकाने का मसला और इन सब के बाद निवेशको के पास जो आता है वो शुद्ध कमाई तो होती है परन्तु काफी कम होती है और यही क्रिया फिक्स्ड डिपाजिट के निवेश को बेहतर नहीं बनाती है |
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