बिटिया
अपने दिल के टुकड़े को
कैसे फिर से जोड़ूँ
बिटिया को कैसे बचपन मोड़ूँ
पलकों पर बैठी ,हथेली पर पांव रखे
ऐसे बाप को कैसे चुप करा दूँ
इक अश्क न गिरने दिया आँखों से
उन मोतियों को पलकों में ही संजो दूँ
बिटिया को कैसे बचपन मोड़ूँ
जिसकी चाहत को अनकहा सुन लिया
जिद्द करने से पहले पूरा कर दिया
उन चाहतो को आज पूरा कर दूँ
बिटिया को कैसे बचपन मोड़ूँ
गलती भी मेरी तुझ पर हक जता बैठा
कर्ज था देना ,इक जमीदार बन बैठा
आ , उस कर्जे को चुकता कर दूँ
तुझे दुल्हन बना कर विदा मैं कर दूँ
बिटिया को कैसे बचपन मोड़ूँ
अब हाथ जोड़कर खड़े होने की आई बारी
इज्जत की पगड़ी तेरे सिर से वारुँ
बिटिया को कैसे बचपन मोड़ूँ
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