भूल जाना कोई बिमारी नहीं ,भूलने की प्रवृति जीवन के लिए उतनी ही जरुरी है जितना की याद रखने की | फुलर नाम के एक व्यक्ति कहा है - युगों से अनुरक्त पिरामिड भी एक दिन अपने बनाने वाले के नाम विस्मृत कर जाते है | सर्वेनटीज कहते है - कोई ऐसी स्मृति नहीं जिसे समय भुला न दे , कोई ऐसी पीड़ा नहीं है जिसे , मृत्यु मिटा न सके |
किसी शायर ने कहा -
सच तो यह की मनुष्य की भूलने की प्रवृति में ही उसकी याददाश्त का बीज छिपा है ,जिसे सिर्फ खोजने भर की जरुरुत है | ओशो की एक किताब में मैनें एक मजेदार किस्सा पढ़ा था जो आपको यहाँ निश्चय ही प्रासंगिक लगेगा | भभूत धारी एक फक्कड बाबाजी ने एक दिन गौर किया की एक आदमी कई दिनों से उनकी कुछ ज्यादा ही सेवा कर रहा है | बाबाजी समझ गये मगर फिर भी माजरा पूछ लिया श्रद्धालु चेले ने मन की इच्छा बता दी | कोई सिद्ध मन्त्र चाहिए | बाबाजी ने बहुत इसकी फिजुलियत समझाई मगर चेला अड़ गया तो बाबाजी ने एक कागज पर लिखकर दे दिया | गुड़ -गुड़ गोला ,कोका कोला | कहा ,स्नान शुद्धि के बाद एक हजार एक बार जप कर लेना | जाप के समय काले मुहँ वाले बंदर का ध्यान बिलकुल भी नहीं आए | चेला खुश होकर घर पंहुचा और सीधा बाथरूम में पहुँच गया स्नान के लिए | स्नान शुरू करते ही हिदायत याद आ गई ,वो काले मुँह वाले बंदर का ध्यान रखना है .. बस चेला जैसे ही सतर्क हुआ काले मुँह के बंदर की आकृति उसके जेहन में उभर गई ,उसने झटककर खयाल को दूर हटाया तो आकृतियों की संख्या बढती गई | वह जैसे जैसे बंदर का खयाल भूलना चाहता उतना ही उसे बंदर याद आने लगे | चेला मन्त्र तो भूल गया और बेहताशा भागता हुआ बाबाजी के चरणों में जा लेटा | कहने लगा सिद्धि मन्त्र को छोडिये ,आप तो मुझे इन काले मुहँ के बंदरो से मुक्ति दिलाइए |
लब्बो लुबाब यह है की जो बात हमारे लिए चिंता का स्वरूप ले लेती है ,वही हमारी स्मृति बन जाती है और जिस बात को लेकर हम बेफिक्र हो जाते है वही विस्मृति | भूलने की बिमारी का इलाज कराने के बजाय हमे जरुरुत है स्मृतियो के नियंत्रित प्रबंधन की | भूलने की प्रवृति कोई बिमारी नहीं बल्कि एक वरदान है जिसका फायदा उठाकर जिन्दगी को खुबसुरत बनाया जा सकता है |
जिन्दगी के उतार चढाव में कई बार हादसों के ऐसे आघात दिल पर लगते है जिनके जख्म यादे यदि कुरेदती ही रहे तो चोबीसो घंटे हम सोना -खाना सब छोडकर सिर्फ रोते ही रहेंगे | हम जितने बडे भुलक्कड़ होंगे हमारी भूलने की कथित बिमारी ,किसी भी अपने की मौत ,किसी दुर्घटना या अपने अपमान की घटना से हमे उतने ही जल्दी उबारने में मदद करेगी | जीवन में खुशियों की अवधि लम्बी रखने के लिए भूलने की आदत का भरपूर फायदा उठाना चाहिए |
किसी भी व्यक्ति ,व्यवस्था या मशीन की क्षमता बढ़ाने के लिए इसे बीच -बीच में विश्राम देना जरुरी है | हमारे मन ,मस्तिष्क और शरीर को विश्राम देने के लिए ईश्वर ने हमे नींद की सौगात दी है मगर मस्तिष्क की कार्यदक्षता बढ़ाने के लिए हमारे पूर्वजो ने योग और ध्यान का आविष्कार किया है | ध्यान ,जिसे हम मैडिटेशन कहते है ,दरअसल ध्यान नहीं अध्यान है इसका अर्थ है , जिन बातो की ओर हमारा बार -बार ध्यान जाता है ,उनसे ध्यान हटाना | इस अध्यान अथवा ध्यान की सफलता के कार्य में हमारी भूलने की सौगात हमारी भरपूर मदद कर सकती है , हम जितना अधिक चीजो को भूलते जायेंगे ,ध्यान की गेहराईयो में उतने ही गहरे उतरते चले जायेंगे | जितने गहरे हम उतरते जायेंगे ईश्वर द्वारा हमे मिली पुननिर्माण की शक्तिया उतनी ही जागृत होती चली जाएगी | इस तरह हमारी भूलने की प्रकृति ही हमारी याददाश्त का सूत्र बन जाएगी |
किसी शायर ने कहा -
भूलना भी जरुरी है याद आने के लिये
दिल में रहना है तो थोडा दूर रहना चाहिये !
सच तो यह की मनुष्य की भूलने की प्रवृति में ही उसकी याददाश्त का बीज छिपा है ,जिसे सिर्फ खोजने भर की जरुरुत है | ओशो की एक किताब में मैनें एक मजेदार किस्सा पढ़ा था जो आपको यहाँ निश्चय ही प्रासंगिक लगेगा | भभूत धारी एक फक्कड बाबाजी ने एक दिन गौर किया की एक आदमी कई दिनों से उनकी कुछ ज्यादा ही सेवा कर रहा है | बाबाजी समझ गये मगर फिर भी माजरा पूछ लिया श्रद्धालु चेले ने मन की इच्छा बता दी | कोई सिद्ध मन्त्र चाहिए | बाबाजी ने बहुत इसकी फिजुलियत समझाई मगर चेला अड़ गया तो बाबाजी ने एक कागज पर लिखकर दे दिया | गुड़ -गुड़ गोला ,कोका कोला | कहा ,स्नान शुद्धि के बाद एक हजार एक बार जप कर लेना | जाप के समय काले मुहँ वाले बंदर का ध्यान बिलकुल भी नहीं आए | चेला खुश होकर घर पंहुचा और सीधा बाथरूम में पहुँच गया स्नान के लिए | स्नान शुरू करते ही हिदायत याद आ गई ,वो काले मुँह वाले बंदर का ध्यान रखना है .. बस चेला जैसे ही सतर्क हुआ काले मुँह के बंदर की आकृति उसके जेहन में उभर गई ,उसने झटककर खयाल को दूर हटाया तो आकृतियों की संख्या बढती गई | वह जैसे जैसे बंदर का खयाल भूलना चाहता उतना ही उसे बंदर याद आने लगे | चेला मन्त्र तो भूल गया और बेहताशा भागता हुआ बाबाजी के चरणों में जा लेटा | कहने लगा सिद्धि मन्त्र को छोडिये ,आप तो मुझे इन काले मुहँ के बंदरो से मुक्ति दिलाइए |
लब्बो लुबाब यह है की जो बात हमारे लिए चिंता का स्वरूप ले लेती है ,वही हमारी स्मृति बन जाती है और जिस बात को लेकर हम बेफिक्र हो जाते है वही विस्मृति | भूलने की बिमारी का इलाज कराने के बजाय हमे जरुरुत है स्मृतियो के नियंत्रित प्रबंधन की | भूलने की प्रवृति कोई बिमारी नहीं बल्कि एक वरदान है जिसका फायदा उठाकर जिन्दगी को खुबसुरत बनाया जा सकता है |
भूलने की बीमारी से उठाने लायक फायदे -
जिन्दगी के उतार चढाव में कई बार हादसों के ऐसे आघात दिल पर लगते है जिनके जख्म यादे यदि कुरेदती ही रहे तो चोबीसो घंटे हम सोना -खाना सब छोडकर सिर्फ रोते ही रहेंगे | हम जितने बडे भुलक्कड़ होंगे हमारी भूलने की कथित बिमारी ,किसी भी अपने की मौत ,किसी दुर्घटना या अपने अपमान की घटना से हमे उतने ही जल्दी उबारने में मदद करेगी | जीवन में खुशियों की अवधि लम्बी रखने के लिए भूलने की आदत का भरपूर फायदा उठाना चाहिए |
किसी भी व्यक्ति ,व्यवस्था या मशीन की क्षमता बढ़ाने के लिए इसे बीच -बीच में विश्राम देना जरुरी है | हमारे मन ,मस्तिष्क और शरीर को विश्राम देने के लिए ईश्वर ने हमे नींद की सौगात दी है मगर मस्तिष्क की कार्यदक्षता बढ़ाने के लिए हमारे पूर्वजो ने योग और ध्यान का आविष्कार किया है | ध्यान ,जिसे हम मैडिटेशन कहते है ,दरअसल ध्यान नहीं अध्यान है इसका अर्थ है , जिन बातो की ओर हमारा बार -बार ध्यान जाता है ,उनसे ध्यान हटाना | इस अध्यान अथवा ध्यान की सफलता के कार्य में हमारी भूलने की सौगात हमारी भरपूर मदद कर सकती है , हम जितना अधिक चीजो को भूलते जायेंगे ,ध्यान की गेहराईयो में उतने ही गहरे उतरते चले जायेंगे | जितने गहरे हम उतरते जायेंगे ईश्वर द्वारा हमे मिली पुननिर्माण की शक्तिया उतनी ही जागृत होती चली जाएगी | इस तरह हमारी भूलने की प्रकृति ही हमारी याददाश्त का सूत्र बन जाएगी |

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