बचपन की यादें
चलो आज फिर से,
हम बचपन को जी लें,
सोंधी सी मिट्टी की,
भीनी सी खूशबू,
शहरों की इमारतों में,
कहीं गुम हो गई,
वो खूशबू,पत्थर, टहनियों से,
शिवालय बनाना,वो
मन्दिर की घंटियों की
जगह घँघरू बजाना,
काश की लौट आए,
वो बचपन हमारा,
वो गुड़िया-गुड्डे की
शादी रचाना ,फूलों-पत्ते
का दावत खिलाना,
वो सावन के झूले ,
आ हवाओं को छू लें,
मिट्टी में खेलें, खिलौने
बना के,गर्मी की लू में,
अमिया को तोड़ें,दौड़ते-भागते,
आँख मिचौलें, कोने में हो लें,
वो बचपन की यादें ,
आ आज हम ,
फिर से जी लें,
चलो आज फिर से,
हम बचपन को जी लें।
हम बचपन को जी लें,
सोंधी सी मिट्टी की,
भीनी सी खूशबू,
शहरों की इमारतों में,
कहीं गुम हो गई,
वो खूशबू,पत्थर, टहनियों से,
शिवालय बनाना,वो
मन्दिर की घंटियों की
जगह घँघरू बजाना,
काश की लौट आए,
वो बचपन हमारा,
वो गुड़िया-गुड्डे की
शादी रचाना ,फूलों-पत्ते
का दावत खिलाना,
वो सावन के झूले ,
आ हवाओं को छू लें,
मिट्टी में खेलें, खिलौने
बना के,गर्मी की लू में,
अमिया को तोड़ें,दौड़ते-भागते,
आँख मिचौलें, कोने में हो लें,
वो बचपन की यादें ,
आ आज हम ,
फिर से जी लें,
चलो आज फिर से,
हम बचपन को जी लें।
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