मोहब्बत - A Divine Love Poetry Hindi
मोहब्बत रूहानी जज़्बात और है यारो,
जहाँ में ढूंँढ़े नहीं पाओगे,
रूह से रूह को मिलने दो,
जज़्बातों में बस ढलने दो,
पड़ गई जो जिस्म की छाया,
रुह को घायल हीं पाओगे ।
रुह को घायल कर जाता है,
जब कोई दिल से दिल-लगी कर जाता है,
दिल मरुस्थल बन जाता है,
शुष्क हो जाती है, अश्कों की दरिया,
मन बावरा सो जाता है,
सांँसे बस आती-जाती हैं ,
मोहब्बत रूहानी जज़्बात है यारों,
जहांँ में ढूँढ़े नहीं पाओगे ।।

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