एक रस होने की आस Beautiful Hindi Poem By Ritu Soni

एक रस होने की आस


वो पूर्ण शक्ति जब बिखर गया,


कण-कण में  सिमट गया ,


तब हुआ इस जग का निर्माण,


वो परमपिता सृजनकर्ता जो,


नित्य सूर्य बन अपनी किरणो से,


नव स्फूर्ति का जीवो में करता संचार,


वो ममतामयी चाँद की चाँदनी बन,


स्नेहिल शीतलता का आँचल फैलाए,


हम जीवो को सहलाता,


टिम-टिम तारो के मंद प्रकाश में,


नयनो में निद्रा बन समाता,


खुली नयनो के अनदेखे सपने,


ले आगोश में हमें दिखाता,


पूर्ण प्रेम जो कण-कण में बिखरा,


एक रस होने की आस जगाता,


तनमयता. को प्रयासरत जीव,


घुलने को, मिटने को,


आपस में जुड़ने को,


पूर्ण प्रेम को पाने को,


व्यथित हुआ है जगत में,


जीव अपना अस्तित्व बनाने को,


इसी धुन में जन-जीवन चलता,


तन मिलता, मन नहीं जुड़ता,


कण-कण में जब बिखरा है,


वो कैसे मिले जमाने को ।।

Comments

  1. I simply want to tell you that I am beginner to blogging and site-building and actually loved you're blog. Almost certainly I’m likely to bookmark your site . You amazingly have fantastic articles and reviews. Thanks a bunch for revealing your blog.

    ReplyDelete

Post a Comment