मानसिक तनाव के बारे में यह महत्वपूर्ण लेख जरुर पढ़े!

मानसिक तनाव के कारण-


तनाव का एक और कारण ,”अतीत की स्मृति और भविष्य कल्पना ” उसने मेरे साथ ऐसा किया ,अब मैं उसके साथ वैसा ही करूँगा | अगर उस समय मैंने वैसा नहीं किया होता तो अभी ऐसा नहीं होता | यदि उस समय ऐसा कर देता तो ठीक रहता | पता नहीं , इस तरह की कितनी यादे व्यक्ति अपने मन में संजोए रखता है | जो बीत गया उसे वापस लौटाया नहीं जा सकता तो उसे याद करने का क्या औचित्य है ? और जो होने वाला है , वह होकर ही रहेगा तो उसके बारे में व्यर्थ का तनाव पालने का क्या औचित्य है ?

जो बीत चूका है उस पर विलाप करने से क्या लाभ और जो अभी उपस्थित नहीं है ,उसकी कल्पना के जाल क्यों बुनना ? माह बीत जाता है कलेंडर से पन्ना फाड़ देते है ,वर्ष बीत जाता है तो कलेंडर को हटा देते है लेकिन व्यक्ति अपने भीतर पलने वाली उतेजना को ,अनगर्ल विचारो को ,दुसरो के प्रति होने वाले वैमनस्य को हटा नहीं पाता |

६० वर्ष की उम्र के बाद व्यक्ति अपने अतीत को बहुत याद करता है और सबसे अधिक चिंता और तनाव से ग्रस्त होता है | जीवन की शेष आयु चिंता और तनाव में बीतती है क्योंकि हमारी अपेक्षाए अपनी संतानों से बढ़ जाती है और जब अपेक्षा उपेक्षा में बदल जाती है तो तनाव उत्पन्न होता है | अच्छा होगा यदि हम ओरो से अपेक्षा न पाले |

मनुष्य दूसरी चिंता करता है “भविष्य की ” वह न जाने किन –किन कल्पनाओ में खोया रहता है | जो कुछ है नहीं ,उसके ही सपने बुनता है | वह अपनी कल्पनाओ के जाल में मकड़ी की तरह उलझा रहता है | न अतीत में जाओ और न ही भविष्य की रुपरेखा बनाओ अपितु वर्तमान में जिओ | जैसा हो रहा है , उसको वैसा ही स्वीकार करो जिसने कल दिया था उसने कल की व्यवस्था भी दी थी और जो कल देगा वह उस कल की व्यवस्था भी अपने आप देगा | तुम व्यर्थ में चिंता करते हो , तुम्हारी चिंता से कुछ होता भी नहीं | तुम व्यर्थ के विकल्पों में क्यों जीते हो ? क्यों खुद को अशांत और पीड़ित कर रहे हो ? तुम्हारे किये कुछ होता नही है क्योंकि जो प्रकृति की व्यवस्थाएं है वे अपने आप में पूर्ण है } माँ की कोख से बच्चे के जन्म बाद में होता है किन्तु उसके लिए दूध की व्यवस्था प्रकृति की ओर से पहले ही हो जाती है |

तनाव के और भी कई कारण होते है | सभी कारणों में हमारी नकारात्मक सोच जुडी है | वह हमारी बुद्धि को विपरीत बना देती है | अत्यधिक काम का बोझ , क्षमता से अधिक कार्य भी तनाव के कारण हो सकते है | हीन- भावना भी तनाव का कारण बनती है |

चिंता ,भय ,अतिलोभ ,उतेजना ,विचारो का असामंजस्य – ये सब तनाव के मूल आधार है | तनाव का पहला प्रभाव हमारे मनो मस्तिष्क पर पड़ता है | उससे हमारा आज्ञाचक्र शिथिल हो जाता है | आज्ञाचक्र को शिव का तीसरा नेत्र बजी कहा जाता है जैसे ही व्यक्ति तनाव का शिकार होता है ,वैसे ही आज्ञाचक्र शिथिल हो जाता है |

Comments