नैतिक शिक्षा पर निबंध-
वर्तमान शिक्षा प्रणाली में नैतिकता व् अनुशासन को कोई स्थान नही दिया गया | इनके बिना शिक्षा अधूरी है और समाज व् राष्ट्र के लिए अभिशाप सिद्ध हो रही है | यही कारण है की जब छात्रों की कोई मांग पुरी नहीं होती ,तो वे विघटनकारी प्रवृतियों में लिप्त हो ,विद्रोह करते है और सरकारी व् निजी वाहनों पर हल्ला बोल देते है , परिणाम सब जानते है | अत: सभी शिक्षण संस्थाओं ,अभिवावकों व् समाज सेवी संस्थाओं को इस विषय पर गहराई से विचार करना चाहिए , ताकि राष्ट्र के भावी कर्णधारो को योग्य ,आदर्श व् उतरदायित्व पूर्ण नागरिक बनाया जा सके |
वर्तमान स्कुलो में इस विषय पर कोई चर्चा नहीं | ऐसा लगता है की भारतीय शब्दकोश से “ नैतिकता ” शब्द लोप हो गया है | घरो में माता –पिता एवं बच्चो की इक्कठे मिल बैठने का समय नहीं मिल पाता है की वे किसी विषय पर बात कर सके | बच्चे जो कुछ बाहर देखते है , सुनते है या मीडिया में देखते है अथवा पत्र पत्रिकाओ में पढ़ते है ,उन्हें सत्य समझकर उनका अनुकरण करते है | कई बच्चे तो उनकी नकल करने में अथवा इन दृश्यों को स्वयं करने में ही अपनी जीवन लीला समाप्त कर चुके है | आज एक बच्चा अपने स्वयं के अपहरण का नाटक कर , अपने ही माता –पिता से फिरोती प्राप्त करना चाहता है अथवा अपने किसी पडोसी का अपहरण कर , फिरौती प्राप्त करना चाहता है और ऐसा न होने पर ,उस बच्चे की हत्या करने में भी नहीं झिझकता | क्या यही है , मीडिया की देंन ? आजकल टीवी तो प्राय सभी घरो में है | न्यजीलैंड में अन्वेषकों ने पाया की जो बच्चे अधिक टीवी देखते है ,वे युवावस्था में आते –आते आपराधिक बर्ताव व् समाज विरोधी गतिविधियों में लिप्त हो जाते है |
आज का युवक भटक गया है | संसार की चकाचौंध देखकर ,वह उच्च स्तरीय जीवन बिताने का स्वप्न संजोये है और उसके लिए वह अपराधो में लिप्त हो रहा है | एक केस में टिप्पणी करते हुए सेशन जज कामिनी ला ने कहा की उच्च शिक्षा प्राप्त समृद्ध परिवारों के बच्चे , परिवार में आदर्श व्यक्तित्व के अभाव एवं कानून का डर न होने के कारण अपनी फिजूलखर्ची और बिना परिश्रम धनार्जन के लिए अपराधो में लिप्त हो रहे है | वे कुछ रुपयों के लिए किसी का वध भी कर सकते है ,यदि उन्हें अपेक्षित धन न मिले | यदि उन्हें चरित्र शिक्षा मिली होती ,तो सम्भवत ऐसी घटनाएँ नहीं होती |
आज कंप्यूटर स्कुलो में प्रवेश कर चूका है | बच्चे क्या करते है , क्या देखते है ,कोई नहीं जानता | वीडियो गेम्स देखने वाले बच्चो में हिंसक प्रवृति जागृत हो जाती है , जो उनके बर्ताव ,स्मरण शक्ति ,भावुकता तथा सीखने की शक्ति को प्रभावित करती है |
विश्वविधालयो एवं कॉलेजों के छात्र संगठन भी चरित्र विकास . नैतिकता एवं अनुशासन का कोई विकल्प नहीं दे पाए और वे भी समाज विरोधी गतिविधियों का केंद्र बने है | वृक्ष वही फल फुल देता है , जिस का आधार दृढ़ हो क्योंकि कॉलेज व् विश्वविधालय के छात्र को बुनियादी चरित्र शिक्षा नहीं मिली है | हमारे नेता उनके इष्ट है और वे आचार संहिता का पालन नहीं करते , तो छात्रों से क्या आशा की जा सकती है ?
सामाजिक व् धार्मिक संस्थाए भी इस विषय पर कुछ नहीं कर पाते , बल्कि कई बार वे स्वयं संदेह के घेरे में आ जाते है | योग गुरु केवल व्यायाम शिक्षक बनकर रह जाते है ,उन्हे योग के अंतर्गत यम –नियम का कोई ज्ञान नहीं रहता ( क्योंकि वे इस विषय में कभी कुछ नहीं बोलते है ) केवल आसन व् प्राणायाम से तो चरित्र निर्माण नही हो जाता ? यम नियम ही नैतिक शिक्षा के आधार है और सम्पूर्ण अष्टांग योग तो मानव को मानसिक , शारीरिक ,भावनात्मक ,बोध्दिक एवं आध्यामिक स्वास्थ्य प्रदान कर ,मोक्ष का राजमार्ग प्रस्तुत करता है |
अंतत: चरित्र विकास एवं नैतिक शिक्षा का दायित्व प्राथमिक स्कूल अध्यापको पर ही आता है उसके लिए उन्हें स्वयं को अनुशासन ,सदाचार एवं नैतिकता में ढालकर उदाहरण प्रस्तुत करना होगा |

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