भ्रष्टाचार
हमारा वर्तमान बहुत ही खतरनाक होता जा रहा है मनुष्य का लचीलापन उसे खतरनाक से खतरनाक जुर्म करने पर मजबूर कर रहा है | अपने लालच के कारण ही आदमी भृष्टाचारी बन रहा है | आज के समय में भ्रष्टाचार ऐसे फैल रहा है | जैसे कोई वायरस हो , कोई रिश्वत ले रहा है तो कोई रिश्वत दे रहा है तो किया इसका अर्थ यही हो सकता है की वर्तमान में हर काम रिश्वत देने और लेने पर ही पुरे होंगे |
भ्रष्टाचारियो की संख्या ऐसे बढ़ रही है जैसे जंगल में लगी आग | हर रोज अखबारों व् टेलीविजन में भ्रष्टाचार के बारे में खबरे छपती रहती है की आज तो नेता रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया ,आज तो पुलिसकर्मी रिश्वत लेते पकड़ा गया | परन्तु इन खबरों से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता |
रिश्वत लेने वाला ऐसे ही लेता रहेगा अगर रिश्वत लेने वालो से यह पूछा जाए की तुम रिश्वत क्यों लेते हो तो वो यही कहेगा की इसकी जिम्मेदार सरकार है क्योंकि सरकार ने हर वस्तु पर इतने टेक्स लगा रखे है जितनी हमारी महीने की तनख्वाह भी नहीं है |
अगर रिश्वत नहीं लेंगे तो हमारे बीवी –बच्चे भूखे मर जायेंगे | और अगर देने वाले से पूछे तो वह भी यही कहेगा की सरकारी काम काज बहुत ही धीरे धीरे होता है | हमेशा सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते है इससे तो अच्छा यही है की हम रिश्वत दे दे |
माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा की गई नोटबन्दी ने एक बार सारे भ्रष्टाचारियो को हिला के छोड़ दिया | सारे अपने काले धन छुपाने के लिए इधर –उधर भागने लगे और इसी कारण पकडे गए |
लेकिन इससे कुछ फर्क नहीं पड़ा कई लोग अभी भी रिश्वत ले रहे है और कालाधन इकट्टा कर रहे है | कानून की नजर में रिश्वत लेने वाला और देने वाला दोनों ही अपराधी होते है | परन्तु जन कानून के रखवाले ही रिश्वत ले रहे हो तो बाकी किया बदल जायेंगे | सरकार को भ्रष्टाचारियो के खिलाफ कड़ा कानून बना चाहिए तथा हर एक व्यक्ति को भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ना चाहिए | क्योंकि देश में स्व्च्छ भारत अभियान चलाकर नहीं लोगो के मन में फैली गंदगी को हटाकर उन्हें जागरूक बनाकर देश को भ्रष्टाचार से मुक्त किया जा सकता है |
जय हिन्द ! जय भारत !
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