फिल्मों में विवाद
एक तरफ़ विद्या बालन की फिल्म सूलू पसंद आ रही है दर्शकों को। वहीं पद्मावती जो कि अभी तक रिलीज़ नहीं हुई उसको लेकर लोगों में मतभेद है। हांलाकि संजय लीला भंसाली जी की कोई भी फिल्म खराब नहीं होती समाज को और लोगों को बहुत पसंद आती है।
परंतु इस बार भंसाली जी के चर्चों में आने का कारण यह है कि उन्होंने इस बार सूफ़ी ग्रंथ पद्मावती को लिखने वाले मलिक जायसी जी के ग्रंथ के साथ खिलवार किया है। राजा रत्नसन के वास्तव जीवन की पहली पत्नी रानी नागमती थी। परंतु, पूरे फिल्म में रानी नागमती का वर्णन नहीं मिला है।
प्रेमिका पद्मावती थी उसका वर्णन फिल्म में दिखाकर भंसाली जी समाज को क्या संदेश देना चाहते हैं। यह समझ नहीं आ रहा है।
अलाउद्दीन खलजी जो खलनायक था उसके साथ पद्मावती का कोई संबंध नहीं था। परंतु फिल्म में इनके भी प्रेम संबध को दिखाया गया है।
यही कारण है कि राजस्थान के लोग और अन्य राज्यों में भी इस फिल्म का विरोध किया जा रहा है। इस बात का थोड़ा क्षोभ हिन्दी साहित्य के लोगों एवं इतिहासकारों के बीच में भी हैं।
पद्मावती को पाठ्यक्रम में भी शामिल किया गया है इतिहास और हिंदी के स्नातक एवं स्नातकोत्तर डिग्री में। परंतु भंसाली जी पर यह आरोप भी है कि उन्होंने इतिहास के साथ छेड़खानी की है। जो पूरी तरह से सच हैं।
परंतु, सुप्रीम कोर्ट का आदेश भी बड़ा होता है। जब उनको कोई असुविधा नहीं तो देश की जनता उस मुर्गी के बराबर है जिसके लिए कहा जाता है कि-- ''घर की मुर्गी साग बराबर''।
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