इंसानियत पर हिन्दी कविता
इंसानियत आज खो गयी है कहाँ
कब जागेगा भारत का ये नौजवां
दुनिया के रंग में बदल गया इन्सान
कभी देता था दोस्त के लिए अपनी जान
अब नहीं है वो बात चले गए वो दिन कहाँ ||
इंसानियत आज खो गयी है कहाँ
वतन के लिए कुर्बानी देते थे हम कभी
वतन को लूट रहे है कैसे –कैसे यहाँ
आजादी तो मिली पर क्या देख रहे है समा
इंसानियत आज खो गयी है कहाँ
आनेवाले दिनों में तो आतंक का खतरा बढ़ा
हर आदमी एक दुसरे से पेश आ रहा है तगड़ा
आनेवाला जमाना देखने हम नहीं रहेंगे वहाँ
इंसानियत आज खो गयी है कहाँ
हर इन्सान जताता है अपना अपना हक यहाँ
इन्सान की नीति पर तो आज हो गया है शक यहाँ
दुनिया बदल गयी है तो कानून भी बदला यहाँ
इंसानियत आज खो गयी है कहाँ
काम करे तो भी पैसा नहीं ये कैसी राजनीती यहाँ
बेरहम जो लोग हुए भृष्टाचार सरकार यहाँ
फंस गया है मुसीबतों में भारत का ये नौजवां
इंसानियत आज खो गयी है कहाँ ||
[…] में ही गुण रहते है | नर में स्त्री भाव ,नारी में नर भाव भी होता है | यही हमारी […]
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