आँखों की जांच करके चश्मा या लेंस लगाने की सलाह देने वाले ऑप्टोमेट्रिस्ट बनकर आप अपना बेहतरीन करियर बना सकते है |
प्रदुषण और असंतुलित खान- पान की वजह से आँखों की समस्या लगातार बढ़ रही है आँखों की देखभाल के लिए लोग मेडिकल टेक्नोलोजी का सहारा ले रहे है| अब नोर्मल फिजीशियन के अलावा इस फील्ड में नए स्पेशलिस्ट का रोल उभर रहा है | जो आँखों की जांच करके चश्मा या लेंस लगाने की सलाह देते है | इस विशेषज्ञ को ऑप्टोमेट्रिस्ट कहा जाता है | आज पुरे भारत देश भी बड़ी संख्या में ऑप्टोमेट्रिस्ट की डिमांड है | आप भी इस फील्ड में अच्छा करियर बना सकते है |
नेचर ऑफ़ वर्क -
[caption id="attachment_840" align="aligncenter" width="640"]
photo source- http://www.wellnesspointe.org/[/caption]
ऑप्टोमेट्रिस्ट या ऑप्टोमेट्रिक फिजीशियन आँखों की जांच में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों के रखरखाव के विशेषज्ञ होते है | वे ऑप्टिकल उपकरणों से उपचार करते है | वे ब्लाइंडनेस ,दूर और नजदीक की कम रोशनी , मायोपिया जेनेटिक प्रोब्लम का इलाज करते है |
योग्यता -
इस कोर्स के लिए कम से कम योग्यता विज्ञान स्ट्रीम से ५० प्रतिशत अंको साथ १२ वी पास हो जरुरी है | फिजिक्स, कैमिस्ट्री ,बायोलोजी ,मैथ्स से १२ वी पास स्टूडेंट्स ऑप्टोमेट्री से सम्बंधित कोर्स में एडमिशन ले सकते है | ऑप्टोमेट्री में बैचलर डिग्री या डिप्लोमा कोर्स के रास्ते खुल जाते है डिप्लोमा कोर्से की अवधि दो वर्ष है और बैचलर डिग्री चार वर्ष का होता है बैचलर डिग्री में तीन साल तक पढाई होती है और एक वर्ष की इन्टेरशिप होती है | इन्टेरशिप के दौरान स्टूडेंट्स को किसी क्लिनिक या अस्पताल में आँख के डॉक्टर के अधीन काम करना होता है |
ये भी पढ़े - B.com के बाद कैरियर के अवसर
ऑप्टोमेट्री में नौकरी के मौके –
ऑप्टोमेट्री कोर्स पूरा करने के बाद आपके पास नौकरी के अवसरों की कोई कमी नहीं होती है जिस तरह आई सर्जन प्रैक्टिस करते है , वैसे ही आप भी प्रैक्टिस कर सकते है | आप्थोमोलिस्ट के रूप में किसी बड़े शोरुम में काम कर सकते है या आँखों के अस्पताल में भी काम कर सकते है | इस फील्ड से जुड़े प्रोफेशनल्स कॉन्टेक्ट लेंस , लेंस इंडस्ट्री या आई डिपार्टमेंट में काम कर सकते है |
सैलरी पैकेज –
अगर आप किसी अच्छे इंस्टीट्यूट से यह कोर्स करते है ,तो शुरुआत में आप पंद्रह से बीस हजार रूपये महीने के कमा सकते हो | जब आपको इस फील्ड में अच्छा अनुभव प्राप्त कर लेते हो तो आपको सैलरी भी बढ़ सकती है |
प्रदुषण और असंतुलित खान- पान की वजह से आँखों की समस्या लगातार बढ़ रही है आँखों की देखभाल के लिए लोग मेडिकल टेक्नोलोजी का सहारा ले रहे है| अब नोर्मल फिजीशियन के अलावा इस फील्ड में नए स्पेशलिस्ट का रोल उभर रहा है | जो आँखों की जांच करके चश्मा या लेंस लगाने की सलाह देते है | इस विशेषज्ञ को ऑप्टोमेट्रिस्ट कहा जाता है | आज पुरे भारत देश भी बड़ी संख्या में ऑप्टोमेट्रिस्ट की डिमांड है | आप भी इस फील्ड में अच्छा करियर बना सकते है |
नेचर ऑफ़ वर्क -
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ऑप्टोमेट्रिस्ट या ऑप्टोमेट्रिक फिजीशियन आँखों की जांच में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों के रखरखाव के विशेषज्ञ होते है | वे ऑप्टिकल उपकरणों से उपचार करते है | वे ब्लाइंडनेस ,दूर और नजदीक की कम रोशनी , मायोपिया जेनेटिक प्रोब्लम का इलाज करते है |
योग्यता -
इस कोर्स के लिए कम से कम योग्यता विज्ञान स्ट्रीम से ५० प्रतिशत अंको साथ १२ वी पास हो जरुरी है | फिजिक्स, कैमिस्ट्री ,बायोलोजी ,मैथ्स से १२ वी पास स्टूडेंट्स ऑप्टोमेट्री से सम्बंधित कोर्स में एडमिशन ले सकते है | ऑप्टोमेट्री में बैचलर डिग्री या डिप्लोमा कोर्स के रास्ते खुल जाते है डिप्लोमा कोर्से की अवधि दो वर्ष है और बैचलर डिग्री चार वर्ष का होता है बैचलर डिग्री में तीन साल तक पढाई होती है और एक वर्ष की इन्टेरशिप होती है | इन्टेरशिप के दौरान स्टूडेंट्स को किसी क्लिनिक या अस्पताल में आँख के डॉक्टर के अधीन काम करना होता है |
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ऑप्टोमेट्री में नौकरी के मौके –
ऑप्टोमेट्री कोर्स पूरा करने के बाद आपके पास नौकरी के अवसरों की कोई कमी नहीं होती है जिस तरह आई सर्जन प्रैक्टिस करते है , वैसे ही आप भी प्रैक्टिस कर सकते है | आप्थोमोलिस्ट के रूप में किसी बड़े शोरुम में काम कर सकते है या आँखों के अस्पताल में भी काम कर सकते है | इस फील्ड से जुड़े प्रोफेशनल्स कॉन्टेक्ट लेंस , लेंस इंडस्ट्री या आई डिपार्टमेंट में काम कर सकते है |
सैलरी पैकेज –
अगर आप किसी अच्छे इंस्टीट्यूट से यह कोर्स करते है ,तो शुरुआत में आप पंद्रह से बीस हजार रूपये महीने के कमा सकते हो | जब आपको इस फील्ड में अच्छा अनुभव प्राप्त कर लेते हो तो आपको सैलरी भी बढ़ सकती है |
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