मिट्टी तो सबका आधार है ,सबके गुरुत्वाकर्षण और सबके स्वास्थ्य का राज है | महात्मा गाँधी तो मात्र मिट्टी से अपनी प्राकृतिक चिकित्सा कर लेते थे | सबसे बड़ी बात है मिट्टी में रहने वाला गुरुत्वाकर्षण हमे एक दुसरे की ओर खींचता है | क्या आपने कभी सोचा की एक व्यक्ति दुसरे व्यक्ति की ओर आकर्षित होता है , क्यों ? क्योंकि उनमे दोनों देहो की मिट्टी का गुरुत्वाकर्षण काम करता है |
स्त्री पुरुष एक दुसरे की ओर आकर्षित होते है क्योंकि मिट्टी की घनात्मक और ऋणात्मक ऊर्जा परस्पर संघटित होती है | यह पृथ्वी तत्व का चुम्बकीय गुरुत्वाकर्षण है | आप अपने को पृथ्वी तत्व से जोडकर रखे | इसके लिए प्रतिदिन १५ मिनट नंगे पांव घुमने जाइए | लोग घुमने तो जाते है पर जूते पहनकर | इससे हवाखोरी तो हो जाती है ,पर पृथ्वी तत्व का संस्पर्श नहीं हो पाता | किसी पब्लिक पार्क में घास पर नंगे पांव १५ मिनट तक चलिए | आप यह न समझे की मैं घास पर चल कर किसी को हिंसा के साथ जोड़ रहा हूँ |
हरी घास पर चलना पृथ्वी और वनस्पति के पास होने का सबसे सुगम रास्ता है सूर्योदय से पहले हरी घास पर जो ओस की बुँदे जमा होती है उन्हें इक्ठटा कीजिए | और अपनी आँखों पर धीरे –धीरे लगाइए | इससे आपकी आँखों की रोशनी बढती है |
प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से यह परंपरा चल पड़ी है , और विदेशो में तो बहुत समय से चली आ रही है “टब बाथ ”! एक ऐसा टब जिसमे गीली मिट्टी भरी रहती है ,उसमे रोगी को रखा जाता है और वह मिट्टी से लथपथ हो जाता है | १० मिनट तक उसे टब में रखा जाता है | फिर बाहर निकालकर १० मिनट तक उसे ऐसे ही रहने देते है, बाद में नहला देते है |
प्राकृतिक चिकित्सक बताते है की २० मिनट तक मिट्टी के साथ रहने से सभी रोग बाहर निकल जाते है उस मिट्टी के साहचर्य में रहा जाय तो शरीर के सारे विकार ,उतेजनाएं ,बुखार जैसी आधि –व्याधियो को वह मिट्टी खीच लेती है | मिट्टी से बाल धोने पर बाल लम्बे समय तक काले ही बने रहते है | जब पांव में काँटा गड जाता है और भीतर ही टूट जाता है तो बड़े –बुजुर्ग कहते है की यदि गुड ,नमक ,अजवाइन ,सरसों ,प्याज डालकर और उसकी लुगदी बनाकर कांटे वाली जगह पर बाँध दिया जाता है | इससे कांटा भीतर ही गल जाता है और शरीर का दर्द भी दूर हो जाता है |
स्त्री पुरुष एक दुसरे की ओर आकर्षित होते है क्योंकि मिट्टी की घनात्मक और ऋणात्मक ऊर्जा परस्पर संघटित होती है | यह पृथ्वी तत्व का चुम्बकीय गुरुत्वाकर्षण है | आप अपने को पृथ्वी तत्व से जोडकर रखे | इसके लिए प्रतिदिन १५ मिनट नंगे पांव घुमने जाइए | लोग घुमने तो जाते है पर जूते पहनकर | इससे हवाखोरी तो हो जाती है ,पर पृथ्वी तत्व का संस्पर्श नहीं हो पाता | किसी पब्लिक पार्क में घास पर नंगे पांव १५ मिनट तक चलिए | आप यह न समझे की मैं घास पर चल कर किसी को हिंसा के साथ जोड़ रहा हूँ |
हरी घास पर चलना पृथ्वी और वनस्पति के पास होने का सबसे सुगम रास्ता है सूर्योदय से पहले हरी घास पर जो ओस की बुँदे जमा होती है उन्हें इक्ठटा कीजिए | और अपनी आँखों पर धीरे –धीरे लगाइए | इससे आपकी आँखों की रोशनी बढती है |
प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से यह परंपरा चल पड़ी है , और विदेशो में तो बहुत समय से चली आ रही है “टब बाथ ”! एक ऐसा टब जिसमे गीली मिट्टी भरी रहती है ,उसमे रोगी को रखा जाता है और वह मिट्टी से लथपथ हो जाता है | १० मिनट तक उसे टब में रखा जाता है | फिर बाहर निकालकर १० मिनट तक उसे ऐसे ही रहने देते है, बाद में नहला देते है |
प्राकृतिक चिकित्सक बताते है की २० मिनट तक मिट्टी के साथ रहने से सभी रोग बाहर निकल जाते है उस मिट्टी के साहचर्य में रहा जाय तो शरीर के सारे विकार ,उतेजनाएं ,बुखार जैसी आधि –व्याधियो को वह मिट्टी खीच लेती है | मिट्टी से बाल धोने पर बाल लम्बे समय तक काले ही बने रहते है | जब पांव में काँटा गड जाता है और भीतर ही टूट जाता है तो बड़े –बुजुर्ग कहते है की यदि गुड ,नमक ,अजवाइन ,सरसों ,प्याज डालकर और उसकी लुगदी बनाकर कांटे वाली जगह पर बाँध दिया जाता है | इससे कांटा भीतर ही गल जाता है और शरीर का दर्द भी दूर हो जाता है |
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